कैसे करे श्राद अमावस्या पर पितरो की विदाई
कुतुप) मुहूर्त = 12:41 to 13:30
Duration = 0 Hours 49 Mins
(रौहिण) मुहूर्त = 13:30 to 14:19
Duration = 0 Hours 49 Mins
काल = 14:19 to 16:46
Duration = 2 Hours 27 Mins
अमावस्या तिथि शुरू = 07:22 on 19/Sep/2017
अमावस्या तिथि समाप्त = 06:29 on 20/Sep/२०१७
हिंदू धर्म के अनुसार महालया अमावस्या पितृपक्ष या श्राद्ध का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। अगर अपने पूर्वजों का सही पुण्यतिथि पता नहीं है। तो व्यक्ति इस दिन उन्हें श्रद्धांजलि और पिंडदान करते हैं। पितरों की तृप्ति के लिए श्रद्धा से किया गया तर्पण या पिंडदान यानि पिंड के रूप में पितरों को दिया गया भोजन और जल आदि को ही श्राद्ध कहा जाता है। पितृपक्ष या श्राद्ध में तर्पण और श्राद्ध करने से व्यक्ति को अपने पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जिससे घर में सुख शांति और समृद्धि बनी रहती है। मान्यता है कि यदि पितर रुष्ट हो जाते है तो व्यक्ति को जीवन में बहुत सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। पितरों की अशांति के कारण धन हानि ,संतान समस्या,रोग शरीर पीड़ा ,गृहकलेश ,आदि दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ता है।
इस दिन स्नान आदि करके अपराह्न में तर्पण ब्राह्मण को भोजन वस्त्र दक्षिणा देकर पूजन करते है आशीर्वाद लेते है। गरीबो और पंडितो को भोजन कराये यह सोचकर की जो अनजाने और अपने मृतक लोग है वह भी अपना श्राद का भोग स्वीकार करे और हमें अपना आशीर्वाद प्रदान करके हमारे परिवार को कृतक करे।अपने घर के बाहर पानी ज़रूर रखे फिर शाम को एक दीपक द्वार पर दूसरा दीपक पीपल के पेड के नीचे पूरी खीर लड्डू जल के साथ रखे। आखिरी दीपक और पूरी खीर लड्डू पुरे घर में घुमाकर अपने घर में जो भी पितृ आत्मा हो उसे पितृ लोक को जाने को कहकर आप दीपक भोजन जल के साथ अपने घर के बाहर जाने वाली सड़क के किनारे रखकर पानी से आचमन तीन बार करके रख कर घर वापस आकर जल से अपना शुद्धि कारन करके पूरे घर में गंगाजल छिड़के।इसप्रकार आपको अमावस्या पर पितरो का पूरी तरह आशीर्वाद और पुण्य प्राप्त हो जायेगा। जय महादेव !ज्योतिषाचार्य कृष्णा शर्मा www.krishtara.com