शारदीय नवरात्र में कैसे करे माँ भगवती की पूजा। किस महूर्त में करे घाट स्थापना।
चन्द्रमा कन्या राशि में दो दिन संचार करेगा कन्या राशि का स्वामी बुध है और यह माँ की पूजा का ख़ास ग्रह है। अखंड ज्योत का विशेष महत्व है। शारदीय नवरात्र में कैसे करे माँ भगवती की पूजा। किस महूर्त में करे घाट स्थापना।
इस बार नवरात्र दस दिन के रहराहेगे यह शुभ संयोग 16 साल के बाद आया है। साल 2000 में ऐसे संयोग हुआ था। प्रतिप्रदा दो दिन रहेगी।
घाट स्थापना का महूर्त सुबह 6 .17 से 07 ;38 मिनट तक का है। और अभिजीत महूर्त का 11;47 से 12;35 है।
उपाय -चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर चावल से स्वस्तिक बनाये। फिर मिटटी के पात्र में मिटटी भर कर जौ बोये। फिर उसपर कलश स्थापित करे जल भर कर कलश पर रोली से ॐ बनाकर गणपति जी का ध्यान करते हुए कलश के मुख पर मोली बांधे। फिर सुपारी सिक्का लेकर मनोकामना बोलकर उनको कलश में डाल दे.उसके बाद आम के 9 आम या अशोक के पत्ते कलश पर रखकर ढक्कन से ढककर चावल भर दे। इसके बाद एक नारियल लेकर लाल चुनरी लपेटे उसके ऊपर रक्षा सूत्र 7 या 3 बार बांधे। और उसको कलश पर स्थापित कर के माँ की पूजा अर्चना करे लाल पुष्प की माला और सिन्दूर मेहँदी सुहाग का सामान अर्पित करे।बर्फी का भोग लगाए। दुर्गा स्तुति और दुर्गा चालीसा का पाठ करे।
मन्त्र।
ॐ देवी सर्वकार्य करनी,
मम निकट संकट हरणी,
मम मनोरथ पूर्णी,
मम चिंता निवारानी,
चन्द्रमा कन्या राशि में दो दिन संचार करेगा कन्या राशि का स्वामी बुध है और यह माँ की पूजा का ख़ास ग्रह है। अखंड ज्योत का विशेष महत्व है। शारदीय नवरात्र में कैसे करे माँ भगवती की पूजा। किस महूर्त में करे घाट स्थापना।
इस बार नवरात्र दस दिन के रहराहेगे यह शुभ संयोग 16 साल के बाद आया है। साल 2000 में ऐसे संयोग हुआ था। प्रतिप्रदा दो दिन रहेगी।
घाट स्थापना का महूर्त सुबह 6 .17 से 07 ;38 मिनट तक का है। और अभिजीत महूर्त का 11;47 से 12;35 है।
उपाय -चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर चावल से स्वस्तिक बनाये। फिर मिटटी के पात्र में मिटटी भर कर जौ बोये। फिर उसपर कलश स्थापित करे जल भर कर कलश पर रोली से ॐ बनाकर गणपति जी का ध्यान करते हुए कलश के मुख पर मोली बांधे। फिर सुपारी सिक्का लेकर मनोकामना बोलकर उनको कलश में डाल दे.उसके बाद आम के 9 आम या अशोक के पत्ते कलश पर रखकर ढक्कन से ढककर चावल भर दे। इसके बाद एक नारियल लेकर लाल चुनरी लपेटे उसके ऊपर रक्षा सूत्र 7 या 3 बार बांधे। और उसको कलश पर स्थापित कर के माँ की पूजा अर्चना करे लाल पुष्प की माला और सिन्दूर मेहँदी सुहाग का सामान अर्पित करे।बर्फी का भोग लगाए। दुर्गा स्तुति और दुर्गा चालीसा का पाठ करे।
मन्त्र।
ॐ देवी सर्वकार्य करनी,
मम निकट संकट हरणी,
मम मनोरथ पूर्णी,
मम चिंता निवारानी,
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