Thursday, March 9, 2017

 होली का महूर्त  -
ज्योतिष के अनुसार होलिका दहन  पूजन भद्रा के मुख को त्याग करके करना ही शुभ  होता है। फाल्गुन मास 12 मार्च को पूर्णिमा उदय व्यापिनी है। इसी पूर्णिमा को प्रदोष काल में होलिका दहन करने का विधान शुभ माना गया है। वहीं इस दिन भद्रा का मुख सांय 5 बजकर 35 मिनट से 7 बजकर 33 मिनट तक है। इसी कारण इस साल होलिका दहन शाम  6 बजकर 30 मिनट से 8 बजकर 35 मिनट तक किया  जा सकता है।
पूजन विधि -पूजा करते वक्त पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठना चाहिए। फिर  माला, रोली, , फूल , कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी, बताशे,गुजिया , गुलाल, नारियल, पॉच प्रकार के अनाज में गेंहूॅ की बालियॉ और साथ में एक लोटा जल लेकर  होलिका के चारों ओर सात  बार परिक्रमा कच्चे सूत को होलिका के चारों ओर  लपेटना चाहिए।  जल से अर्घ्य दे। फिर  होलिका में अग्नि प्रज्ज्वलित करने से पहले होलिका में लगे हुए डंडे को बाहर निकाल दे ।होलिका दहन के बाद  होली की  राख को घर के चारों ओर और दरवाजे पर छिड़क देना  चाहिए।  ताकि आपके घर में  घर में सुख-समृद्धि बनी रहे और साथ ही  नकारात्मक शक्तियों  का प्रवेश  भी नहीं हो सके ।
 इसी के साथ आप सभी को और आपके परिवार को होली की मंगल कामना की हार्दिक बधाई ,शुभ होली। ,हर हर महादेव। ज्योतिषाचार्य कृष्णा शर्मा। 

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