महाशिवरात्रि पूजा मुहूर्त-
चतुर्दशी 21:38 पर 24 फरवरी को है ,और 21:20 पर अगले दिन समाप्त है।
इसदिन पूजा प्रत्येक अवधि व् प्रहार में करा जाता है।
निशिता काल पूजा के समय: 24:08 24:59 करने के लिए
महाशिवरात्रि पाराना समय: 25 फरवरी, 06:54 15:24 करने के लिए
महाशिवरात्रि के दिन व्रत करने से और भगवान शिव पूजा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं। भूत-प्रेत की पीड़ा, ग्रहों से होने वाली दिक्कतें दूर होती है।
पूजाविधि=
महाशिवरात्रि को पूजा करते वक्त सबसे पहले मिट्टी के बर्तन में पानी भरकर, ऊपर से बेलपत्र, धतूरे के पुष्प, चावल आदि डालकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। वहीं अगर घर के आस-पास में शिवालय न हो, तो शुद्ध गीली मिट्टी से ही शिवलिंग बनाकर भी उसे पूजा जा सकता है। वहीं इस दिन शिवपुराण का पाठ सुनना चाहिए और पाठ करना चाहिए। शिव पुराण में महाशिवरात्रि को दिन-रात पूजा के बारे में कहा गया है और चार पहर दिन में शिवालयों में जाकर शिवलिंग पर जलाभिषेक कर बेलपत्र चढ़ाने से शिव की अनंत कृपा प्राप्त होती है। कई लोग चार पहर की पूजा भी करते हैं, जिसमें बार बार शिव का रुद्राभिषेक करना होता है।
चारों प्रहर के पूजन में शिवपंचाक्षर (नम: शिवाय) मंत्र का जाप करें। भव, शर्व, रुद्र, पशुपति, उग्र, महान, भीम और ईशान, इन आठ नामों से फूल अर्पित कर भगवान शिव की आरती व परिक्रमा करें। अगर आपने व्रत नहीं किया है तो आपको सामान्य पूजा तो अवश्य करनी चाहिए। जिसमें शिवलिंग को पवित्र जल, दूध और मधु से स्नाोन करवाएं। भगवान को बेलपत्र अर्पित करें। इसके बाद धूप बत्ती, करें। फिर दीपक जलाएं। ऐसा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं। इस दिन इन मंत्रों का जाप करें।
ॐ नमः शिवाय। १०८ बार
शिव वंदना-
ॐ वन्दे देव उमापतिं सुरगुरुं, वन्दे जगत्कारणम्।
वन्दे पन्नगभूषणं मृगधरं, वन्दे पशूनां पतिम्।।
वन्दे सूर्य शशांक वह्नि नयनं, वन्दे मुकुन्दप्रियम्।
वन्दे भक्त जनाश्रयं च वरदं, वन्दे शिवंशंकरम्।।
महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माम् मृतात् ।।
जय महादेव ज्योतिषाचार्य कृष्णा शर्मा।
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