Friday, December 30, 2016

वृष राशि - 
इस वर्ष वृषभ राशि के जातकों को उच्च प्रतिष्ठित लोगों के सहयोग से लाभ मिलेगा।इसी लिए आपको अपने उच्च अधिकारीयों व सहयोगियों से तालमेल रखकर चलना होगा।आर्थिक स्थिति काफी शानदार रहने की संभावना है।। छात्रों की शिक्षा अच्छी रहेगी।विद्यार्थी काफी प्रगति करेंगे। धन-प्राप्ति के मार्ग खुलने का सौभाग्य भी प्राप्त होगा तथा पराक्रम में बढ़ोत्तरी होगी। आय के नए स्रोत बन सकते हैं। निवेश किए हुए धन का लाभ मिलेगा। अप्रैल माह से अचानक धन लाभ के योग बनेंगे,। साल के मध्य से आपके बिगड़े हुए कार्यों में सुधार होगा व आर्थिक स्थिति अच्छी रह सकती है। शेयर बाज़ार या ज़मीन संबंधी कार्य में पैसा लगाने से फ़ायदा मिल सकता है। आपके लाइफ़ पार्टनर को कुछ शारीरिक परेशानियाँ रह सकती हैं,परआपको बदलते मौसम से होने वाली बीमारियाँ परेशान कर सकती हैं,खान-पान की आदतों पर कंट्रोल करने की कोशिश करें।
इस वर्ष आपको परिवार में सभी सदस्यों का सहयोग मिलेगा। संतान-पक्ष से ख़ुशियाँ हासिल हो सकती हैं। साल के अंत से आर्थिक स्थिति अच्छी रह सकती है। फ़िज़ूलख़र्ची पर कंट्रोल कर आप अपनी बचत और फ़ायदे को बढ़ा सकते हैं। जीवन साथी से ताल मेल बनाकर चलें।आप किसी नए प्रेम संबंध में पड़ सकते हैं। वहीं पुराने प्रेम संबंधों में मज़बूती आने की संभावना है।वृषभ राशि वालों के लिए शनि की ढैय्या प्राम्भ हो जाएगी,शनि  13 महीनों तक बहुत अधिक परेशान करने वाली स्थिति उत्पन्न करेगा . इस दौरान व्यर्थ का भ्रमण होगा , अनैतिक कार्यों में रूचि बढ़ेगी . हर दिन किसी ना किसी समस्या से जूझना पड़ेगा .सुगन्धित चीज़ों का प्रयोग करना आपके लिए श्रेष्ठ रहेगा।शारीरिक पीड़ा, रक्त विकार, पारिवारिक कष्ट और व्यापार में हानि हो सकती है।  
कैसा रहेगा आपके लिए साल २०१७ मैं ज्योतिषाचार्य कृष तारा कृष्णा शर्मा राशियों के अनुसार बताऊगी।


मेष राशि- इस वर्ष आप अपने परिश्रम से धन प्राप्त करेंगे। माता-पिता के सहयोग से भी परिस्थिति में परिवर्तन होगा। आप किसी नए कार्य की योजना बनायेंगे, जिससे सफलता मिल सकती है।रुके हुए कुछ काम बनने की भी संभावना है।अपने ख़र्चों को नियंत्रित करने की ज़रूरत है। आपकी संतान को कुछ स्वास्थ्य संबंधी परेशानी रह सकती है,भाई-बन्धु के साथ वाद-विवाद से बचें। क्रोध को क़ाबू में रखना उत्तम रहेगा।. घर में किसी बुजुर्ग या पिता का शोक हो सकता है . सहायक कर्मचारी , करीबी मित्र भी मानसिक कष्ट देंगे . कुल मिलाकर समय सावधानी का है.अपना मकान बनाने की संभावना प्रबल रहेगीअगर आप व्यापारी हैं तो व्यवसाय में लाभ और उन्नति के मौक़े मिलेंगे, परन्तु धन का व्ययसोच समझकर ही खर्च करे।। किसी मित्र-सहयोगी की सहायता से आपके बिगड़े हुए कार्य बनेंगे,शनि की ढैय्या २६ जनवरी २०१७ को ख़त्म हो जाएगी पर धनु राशि में शनि देव प्रवेश करेगे तो शनि देव आपकी कुंडली में दशम और एकादश भाव का स्वामी अब आपके अष्टम भाव से नवम भाव अर्थात भाग्य स्थान में प्रवेश करेगा जहाँ से इसकी सीधी दृष्टि एकादश भाव में , पराक्रम भाव में तथा छठे भाव में होगी . शनि की इस स्थिति के कारण करीबी लोगों से वाद – विवाद भी कराएगा . शत्रु परेशान कर सकते हैं . कोर्ट कचहरी के मामलों में असफलता का योग बनेगा . कोई रोग भी परेशान कर सकता है.क्रोध और हठ बढेगा गहरी गूढ. विद्याओं में रूचि बढ़ेगी ,कुल मिलाकर समय सावधानी का है .बड़े भाई का सम्मान करे।  प्रेम के मामले में संतुलन बनाकर चलें तो उत्तम रहेगा। अपने प्रिय को वक़्त दें व उनके साथ कहीं घूमने जाएँ । स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहे।  नौकरीपेशा लोग अपने परिवार से दूर रह सकते हैं। आर्थिक लाभ की दृष्टि से यह वर्ष आपके लिए कुछ मिलाजुला रहेगा। छात्रों की पढ़ाई में दिक्क़तें आने के आसार हैं।-----जय महादेव शुभ मंगलम। 

Thursday, October 20, 2016

विजय दशमी पर करे धन ,यश,बुद्धि, प्राप्ति के ख़ास उपाय। जो बढ़ायेगा व्यापर ,दूर होगा रोग। Samachar Plus: Astro Maa | 11 Oct 2016

व्यापार में सफलता पाने के लिए ,आमंदनी बढ़ाने के लिए करे कुछ खास उपाय। Samachar Plus: Astro Maa | 18 Oct 2016

मोमबत्ती व् दीपक लगाने से किस ग्रह और किस भगवान् को कर सकते है प्रसन्न।घर में किस दिशा में किस रंग की मोमबत्ती व् दीपक जलाने से होता है लाभ। Samachar Plus: Astro Maa | 20 Oct 2016

करवाचौथ पर सुहागिनों को मिलेगा सौभाग्य का उपहार। गणपति जी और माँ पार्वती की पूजा करेगी कल्याण। Samachar Plus: Astro Maa | 19 Oct 2016

Saturday, October 15, 2016

सुविचार दिल से =
जब भी अपनी शख्शियत पर अहंकार हो, एक फेरा शमशान का जरुर लगा लेना। और.... जब भी अपने परमात्मा से प्यार हो, किसी भूखे को अपने हाथों से खिला देना। जब भी अपनी ताक़त पर गुरुर हो, एक फेरा वृद्धा आश्रम का लगा लेना। और…. जब भी आपका सिर श्रद्धा से झुका हो, अपने माँ बाप के पैर जरूर दबा देना।

Monday, October 3, 2016

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

माँ चंद्रघंटा की पूजा से होंगी दुःख तकलीफ और भय से मुक्ति। माँ की विशेष पूजा से होगी कामना पूरी। 

नवरात्र का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा का होता है। बेहद ही मनोरम और दिव्य मां का यह रूप काफी प्रिय है ।
देवी दुर्गाजी की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा है।   माँ का स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनके मस्तक में घंटे का आकार का अर्धचंद्र है इसलिए इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। इनके शरीर का रंग सोने के समान चमकीला है।चेहरा शांत एवं सौम्य है और मुख पर सूर्यमंडल की आभा छिटक रही होती है।  इनके दस हाथ हैं. इनके दसों हाथों में खड्ग, तलवार, ढाल, गदा, पाश, त्रिशूल, चक्र,धनुष, भरे हुए तरकश  विभूषित हैं। इनका वाहन सिंह है। मां की सच्चे मन की अराधाना व्यक्ति की हर ख्वाहिश पूरा करती है।चंद्रघंटा की कृपा से अलौकिक एवं दिव्य सुगंधित वस्तुओं के दर्शन तथा अनुभव होते हैं। इस दिन साधक का मन 'मणिपुर' चक्र में प्रविष्ट होता है यह क्षण साधक के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं।
मंद मंद मुस्कुरा रही माता का ऐसा अदभुत रूप देखकर सभी  मुग्ध होते हैं। इनका उपासक सिंह की तरह पराक्रमी और निर्भय हो जाता है इनकी अराधना सदा फलदायी है,.
माँ को गुड़हल के फूलो की माला और सिन्दूर चढ़कर मीठा पान का भोग लगाए। साथ ही एक धातु का घंटा या घंटी तिलक करके माँ को अपनी प्राथना के साथ भेट करे। और वैजयंती की और रुद्राक्ष की माला पर निम्न मन्त्र का जाप १०८ बार करे। और फिर कहे हे महादेवी, महाशक्ति चन्द्रघंटा को मेरा प्रणाम है, बारम्बार प्रणाम है। 
मन्त्र ;- 1) देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि देवि परं सुखम् ।
          रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥
        2) ॐ नमो  वन्दे चन्द्रर्घकृत शेखराम।
         सिंहारूढा दशभुजां चन्द्रघण्टा नमोस्तते 
माँ शैलपुत्री की पूजा व् स्वरुप
नवरात्रों की शुरुआत माँ दुर्गा के प्रथम रूप "माँ शैलपुत्री" की उपासना के साथ होतीहै। शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्मी माँ दुर्गा के इस रूप का नाम शैलपुत्रीहै।
मां शैलपुत्री : पार्वती और हेमवती इन्हीं के नाम हैं। माँ का वाहन वृषभ है और इनके दाएँ हाथ में त्रिशूल और बाएँ हाथ में कमल का फूल है।आश्विन शारदीय नवरात्र में माता की पूजा 01 अक्टूबर और 02 अक्टूबर को की जाएगी।
गाय का घी मां को अर्पित करना चाहिए और फिर वह घी ब्राह्मण को दे देना चाहिए। माता शैलपुत्री की भक्तिपूर्वक पूजा करने से मनुष्य कभी रोगी नहीं होता।
  मन्त्र   -  ;ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
या देवी सर्वभू‍तेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
 शारदीय नवरात्र में कैसे करे माँ भगवती की पूजा। किस महूर्त में करे घाट स्थापना।

चन्द्रमा कन्या राशि में दो दिन संचार करेगा कन्या राशि का स्वामी बुध है और यह माँ की पूजा का ख़ास ग्रह है।  अखंड ज्योत का विशेष महत्व है। शारदीय नवरात्र में कैसे करे माँ भगवती की पूजा। किस महूर्त में करे घाट स्थापना।

इस बार नवरात्र दस दिन के रहराहेगे यह शुभ संयोग 16 साल के बाद आया है। साल 2000 में ऐसे संयोग हुआ था। प्रतिप्रदा दो दिन रहेगी।
घाट स्थापना का महूर्त सुबह 6 .17 से 07 ;38 मिनट तक का  है। और अभिजीत महूर्त का 11;47 से 12;35  है।
उपाय -चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर चावल से स्वस्तिक बनाये। फिर मिटटी के पात्र में मिटटी भर कर जौ बोये। फिर उसपर कलश स्थापित करे जल भर कर कलश पर रोली से ॐ बनाकर गणपति जी का ध्यान करते हुए कलश के मुख पर मोली बांधे। फिर सुपारी सिक्का लेकर मनोकामना बोलकर उनको कलश में डाल दे.उसके बाद आम के 9 आम या अशोक के पत्ते कलश पर रखकर ढक्कन से ढककर चावल भर दे। इसके बाद एक नारियल लेकर लाल चुनरी  लपेटे उसके ऊपर रक्षा सूत्र 7 या 3 बार बांधे। और उसको कलश पर स्थापित कर के माँ की पूजा अर्चना करे लाल पुष्प की माला और सिन्दूर मेहँदी सुहाग का सामान अर्पित करे।बर्फी का भोग लगाए। दुर्गा स्तुति और दुर्गा चालीसा   का पाठ करे।
मन्त्र।
ॐ देवी  सर्वकार्य करनी,
मम निकट संकट हरणी,
मम मनोरथ पूर्णी,
मम चिंता निवारानी,

''या देवी सर्वभूतेषु मां बह्मचारिणी रूपेण संस्थिता ,नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
शक्ति के दूसरे स्वरुप माँ ब्रह्मचारणी की पूजा से मिलेगा सौभाग्य,ज्ञान और बल का वरदान। दूर होगा आलस्य, अंहकार, लोभ, असत्य।

मां दुर्गा का दूसरा रूप ब्रह्मचारिणी को सभी विधाओं का ज्ञाता माना जाता है। मां के इस रूप की आराधना से मनचाहे फल की प्राप्ति होती है। तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार व संयम जैसे गुणों की वृद्धि होती है।
ब्रहमचारिणी मां दुर्गा स्वेत वस्त्र पहने दाएं हाथ में अष्टदल की माला और बांए हाथ में कमण्डल लिए हुए सुशोभित है। पैराणिक ग्रंथों के अनुसार नराद मुनि के उपदेश के बाद माँ ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया। जिस कारण इनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा। 1000 वर्षों तक सिर्फ फल खाकर ही रहीं तथा अगले 3000 वर्ष की तपस्या सिर्फ पेड़ों से गिरी पत्तियां खाकर की। इसी कड़ी तपस्या के कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी व तपस्चारिणी कहा गया है। कठोर तप के बाद इनका विवाह भगवान शिव से हुआ।
उपाय -
महादेव की पूजा के बगैर देवी की कृपा नहीं मिलती है. इस लिए प्रथम महादेव की पूजा फिर माँ की पूजा करे।माता को दूध गगाजल से स्नान कराये वस्त्र ,माला, सिन्दूर अर्पित करके चीनी का भोग लगाए और शिव पार्वती जी को सात बार गठबंधन में बांधे। चन्दन का इत्र मेहँदी अर्पित करे।रुद्राक्ष की माला पर मंत्रो का जाप करे।और सबसे अंत में ब्रह्मा जी के नाम से जल, फूल, अक्षत, सहित सभी सामग्री हाथ में लेकर “ॐ ब्रह्मणे नम:” कहते हुए सामग्री भूमि पर रखें और दोनों हाथ जोड़कर सभी देवी देवताओं को प्रणाम करें.
इस दिन साधक स्वाधिष्ठान चक्र (Swadhisthan Chakra) में मन को स्थापित करता हैऔर व्यक्ति की कुण्डलनी शक्ति जागृत हो जाती है.
ध्यान मंत्र;
1)शंकरप्रिया त्वंहि भुक्ति-मुक्ति दायिनी।
शान्तिदा ज्ञानदा ब्रह्मचारिणीप्रणमाम्यहम्।
2)ॐ भगवती ब्रह्मचारणी नमो स्वाहा!

navraatri pooja vidhi vidhan. Aaye Navrate Special on Samachar plus I 01 Oct 2016

Wednesday, September 21, 2016

किस महूर्त में करे श्राद जो हो लाभ कारी। Samachar Plus: Astro Maa | 17 Sep 2016

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Samachar Plus: Astro Maa | 21 Sep 2016कुत्ते बिल्ली की आवाज़ नकारात्मक शकितयों की आवाज़ से कैसे बचे।